Arrival of European companies ( यूरोपीय कंपनियों का आगमन)

European companies arrived in India at the time when the Mughal dynasty was ruling India and geographical exploration was about to begin in Europe, at that time many companies come to India and start doing business here, so let’s go. We see how companies come to India and do business



यूरोपीय कंपनियों का आगमन भारत में उस टाइम हुआ जिस टाइम भारत में मुगल वंश का शासन चल रहा था और यूरोप में भौगोलिक खोज की शुरुआत होने वाली थी उस टाइम भारत में बहुत सी कंपनियां आती है और यहां पर व्यापार करना स्टार्ट कर देती है तो चलिए हम लोग देखते हैं कि किस प्रकार से भारत में कंपनियां आती है और कैसे व्यापार करती हैं

Order of arrival of companies :-

  1. Portuguese =1498
  2. Dutch =1595
  3. English = 1600
  4. French =1664

कंपनियों के आगमन का क्रम

  1. पुर्तगाली =1498
  2. डच =1595
  3. अंग्रेज =1600
  4. फ्रंच =1664
  1. Portuguese =1498

Portuguese people come in 1498 but they establish their company in 1503. This company opens in their coaching, they do business there. Portuguese people come to India crossing Africa and demand from the route by which Portuguese people come to India. The name of the Cape of Good Hope was by the same route Vasco da Gama also came to India Vasco da Gama was the first to come to India and he was the one who discovered India Vasco da Gama comes to India in 1498 and he stops at the port of Calicut and information about his arrival from there At that time the king of Calicut port was Jemorian, he also welcomes Vasco da Gama after his arrival, after them Pedro-Albarez comes to India, he is also Portuguese and also comes to India and does his business and at the time these people came Whether it is Pedro-Albarez or Vasco da Gama, then these people have come under the leadership of Prince Henry, because at that time the King of Portugal was Prince Henry, the first from the Portuguese, Francisco de Almeida comes in 1505 AD and it stays in India till 15 09 AD. He was the Viceroy and he was the one who founded the Blue Water Albuquerque is said to be the real founder of the Portuguese, because only after his arrival, the Portuguese business started running well in India because they adopted a new policy. Living in harmony with people Marrying people here Marrying Indians and adopting their rules Goa was also conquered under the leadership of Albuquerque After Albuquerque Nana-de-Cunha came to India and he Make Goa the capital The capital of Goa is Coaching and Nana-de-Cunha conquers Diu in 1535 AD and then conquers Daman in 1559, thus the Portuguese take over India, finally in 1961. The Portuguese get freedom from Goa. It is said that the first printing press in India was also started by the Portuguese people.

पुर्तगाली लोग 1498 में आते हैं लेकिन वह अपने कंपनी की स्थापना 1503 में करते हैं यह कंपनी उनका कोचिंग में खुलता है वह वहीं पर व्यापार करते हैं पुर्तगाली लोग अफिरका को क्रॉस करते हुए भारत आते हैं और जो मार्ग से पुर्तगाली लोग भारत आते हैं उससे र्मांग का नाम केप ऑफ गुड होप था उसी मार्ग से वास्कोडिगामा भी भारत आए थे वास्कोडिगामा ही सबसे पहले भारत आए थे और उन्होंने ही भारत की खोज की थी वास्कोडिगामा 1498 में भारत आते हैं और वह कालीकट बंदरगाह पर रुक जाते हैं और वहीं से आने का सूचना भेजते हैं उस टाइम कालीकट बंदरगाह के राजा जेमोरियन थे वास्कोडिगामा के आने के बाद उनकी स्वागत भी करते हैं इनके बाद में पेड्रो -अलबरेज भारत आते हैं यह भी पुर्तगाली हैं और यह भी भारत में आकर अपना व्यापार करते हैं और जिस टाइम यह लोग आए हुए हैं पेड्रो -अलबरेज या फिर वास्कोडिगामा तो यह लोग प्रिंस हेनरी के नेतृत्व में आए हुए हैं क्योंकि उस टाइम पुर्तगाल के राजा प्रिंस हेनरी थे पुर्तगाली से सबसे पहले फ्रांसिस्को द अलमेडा आते हैं 1505 ईसवी में और यह 15 09 ईसवी तक भारत में रहते हैं प्रथम वायसराय थे और इन्होंने ही ब्लू वाटर पॉलिसी चलाई थी इनके बाद आते हैं अफ्रांसिस्को द अल्बुकर्क आते हैं अल्बुकर्क को पुर्तगालियों का वास्तविक संस्थापक कहा जाता है क्योंकि इनके आने के बाद ही भारत में पुर्तगालियों का व्यापार अच्छे से चलने लगा था क्योंकि इन्होंने नई नीति अपनाई इन की नीति यह थी कि यहां के लोगों से मिल जुल कर रहना यहां के लोगों से शादी विवाह करना यह लोग भारतीयों से शादी करते थे और अपने रूल को अपनाते थे अल्बुकर्क के नेतृत्व में ही गोवा को भी जीता गया था अल्बुकर्क के बाद नाना -डी- कुन्हा भारत आते हैं और उन्होंने गोवा को राजधानी बना देते हैं गोवा की राजधानी कोचिंग होती है और नाना -डी -कुन्हा ने 1535 ईसवी में दीव को जीतते हैं और इसके बाद 1559 में दमन को जीत लेते हैं इस प्रकार से पुर्तगाली लोग भारत पर अपना कब्जा जमाते हैं आखिरकार 1961 में पुर्तगालियों को गोवा से आजाद कर लेते हैं कहा जाता है कि भारत में सबसे पहले प्रिंटिंग प्रेस का शुरुआत भी पुर्तगाली लोग ही किए थे



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